Monday, 23 December 2019 13:28

मानव जीवन पर प्रदूषण का प्रकोप

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जल प्रदूषण : गंदे नाले जल प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत है। इनका जल सतह से गुजरकर भूजल में भी जहर घोल रहा है । एक अनुमान के मुताबिक एक लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में प्रतिदिन 16,662 मिलियन लीटर गंदा पानी निकलता है । राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान , नागपुर के अनुसार नदी जल का 70% हिस्सा बड़े पैमाने पर प्रदूषित हो गया है । इस प्रदूषण के कारण पिछले 20 वर्षों में समुद्री जीवों की संख्या में 40% की कमी आयी है । 

भारत में प्रतिवर्ष जल जनित रोगों से एक लाख में से 360 व्यक्तियों की मृत्यु होती है। गुजरात सहित कई राज्यों में भूगर्भ जल सैकड़ों फुट नीचे चला गया है । इतनी गहराई से जल खीचने के कारण उसमें ऐसे कई तत्व आ जाते हैं , जो मनुष्य के साथ साथ पशुओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं । शुद्ध जल की उपलब्धता आज देश में बड़ी समस्या बन गई है । इसके कारण पानी का व्यापार बड़े पैमाने पर फलफूल रहा है ।
 
वाय प्रदूषण : अभी पराली जलाने और उससे उत्पन्न प्रदूषण से दिल्ली की हवा के प्रदूषण की चर्चा जोरों पर है । इस प्रदूषण का सारा ठीकरा किसानों पर फोड़ा जा रहा है । क्या पराली पहली बार जलायी जा रही है ? मै मानता हूं कि इसके लिए कृषि का अंधाधुंध मशीनीकरण जिम्मेदार है । पहले धान हाथ से काटे जाते थे । इसमें खेत में पराली नहीं बचती थी । अब कंबाइन हार्वेस्टर मशीनों द्वारा धान की कटाई होती है । इसमें काफी लंबी पराली खेतों में रह जाती है। किसानों के लिए इसे निकालना महंगा काम है , इसलिए वे इसे जलाते है ।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस सभ्यता को शैतानी सभ्यता बताते हुए हमें चेताया था । पर हमें लगा कि गांधी की बात दकियानूसी तथा आधुनिकता के खिलाफ है और हम उसी शैतानी सभ्यता की गोद में जाकर बैठ गए । बापू सिलाई मशीन के समर्थक थे पर ऐसी मशीन के विरोधी थे , जो मनुष्य को गुलाम बनती है।  यदि हम अब भी नहीं चेते तो परिणाम और भी गंभीर होते जाएंगे ।
पराली के धुएं से भी खतरनाक होता है उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषण क्योंकि इसमें ईंधन के रूप में पेटकोक का इस्तेमाल होता है । यह डीजल के मुकाबले 65 हज़ार गुना ज्यादा प्रदूषण फैलता है । इसलिए इसे दुनिया भर में डर्टी फ्यूल कहा जाता है । अमेरिका से लेकर चीन तक इस पर प्रतिबंध है , पर 2018 तक भारत दुनिया के 45 देशों से सिर्फ इसे आयात ही नहीं करता था , बल्कि इस पर टैक्स के साथ साथ जी•एस•टी रीफंड भी हासिल था । अब सरकार की नींद खुली है और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है ।
स्वास्थ्य संगठन के 2018 के आंकड़ों के अनुसार विश्व के सर्वाधिक 20 प्रदूषित शहरों की सूची में 15 शहर भारत के हैं । दुनिया में प्रदूषण के कारण मृत्यु के मामले में भारत का क्रम तीसरा है । एक अंदाज़ के मुताबिक 2016 में प्रदूषण के कारण भारत में 9 लाख लोगों की मौत हुई तो वहीं नवम्बर 2019 में दिल्ली दुनिया का सर्वाधिक प्रदूषित शहर बन गया है । पिछले एक दशक में भारत का सफल घरेलू उत्पादन 2.5 प्रतिशत बढ़ा है । जबकि भारत में वाहनों से होने वाला प्रदूषण 4 गुना बढ़ा है ।
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