कानपुर में बनाए गए जीरो बजट खेती करने के आधुनिक उपकरणों को देखने पहुँचे गुजरात के राज्यपाल देवव्रत आचार्य | Featured

Wednesday, 22 January 2020 06:30 Written by  Published in सभी खबरे Read 235 times

खेती हमेशा से देश ही नहीं बल्कि दुनिया को भी संचालित करने का एक महत्वपूर्ण अंग रही है | देश में कई भू-भागों के किसानों के लिए खेती समय-समय पर लाभदायक सिद्ध हुई तो कई जगह मौसमी कारणो के चलते किसानों को तमाम कठनाइयों और संकटों से भी गुजरना पड़ता है | वर्तमान आधुनिक खेती अधिक महंगी है क्योंकि इसमें डीजल तथा बिजली आदि के तमाम खर्चे शुमार हैं | लेकिन इन खर्चों को कम ही नहीं बल्कि विलुप्त कर देने के लिए कानपुर के युवाओं ने कुछ अहम यंत्र बनाए हैं जिनका निरीक्षण करने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत कानपुर के बिधनू ब्लॉक के बघारा गाँव पहुँचे |

कानपुर का नया कारनामा : असल में कृषक विवेक चतुर्वेदी के नेतृत्व में आई॰आई॰टी॰ कानपुर से बीटेक पुनीत गोयल , दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीटेक अनंत चतुर्वेदी और आई॰आई॰एम कोलकाता से एमबीए अंशुमन सचान ने स्टार्टअप कंपनी विकल्प बनाई है | विवेक ने मीडिया के सामने राज्यपाल महोदय को बैल और सोलर एनर्जी से चलने वाला ट्यूबवेल और ट्रैक्टर दिखाया तथा टीम विकल्प ने बताया कि इससे थ्रेशर , छोटी धनकुट्टी और छोटी आटा चक्की भी चलाई जा सकती है | गेहूं , चना , सरसों , मक्का , मटर , धान आदि की बुआई के लिए विकल्प बीजर और ई-वीडर को भी प्रदर्शित किया |

राज्यपाल को जानकारी दी गई कि इन यंत्रों से अकेले एक आदमी तीन चार घंटे में एक एकड़ की बिजाई और निराई कर सकता है | यंत्र से बुआई पर 80 से 90 प्रतिशत बीज के बचत होती है | साथ ही पैदावार भी डेढ़ गुना अधिक और सिंचाई कम करनी पड़ती है |

राज्यपाल ने बताए खेती के राज : राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने विकल्प के प्रयासों की सराहना की तथा  जीवमृत के विषय में जानकारी दी | बताया एकड़ फसल के लिए 190 लीटर पानी , 10 किलो गाय का गोबर , 10 लीटर गौमूत्र , 5 किलो गुड़ , 5 किलो बेसन का मिश्रण सड़ने के बाद जीवामृत बनता है | इसका प्रयोग फसल में करने से रासायनिक खाद डालने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है |