Saturday, 21 April 2018 03:04

वो देशभक्त कश्मीरी लड़की कौन थी ?

Written by रवींद्र त्रिपाठी
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बात 1970-71 की है। दिल्ली या विश्वविद्यालय में सहमत नाम सीएक कश्मीरी लड़की पढ़ती है। वो बेहद रहमदिल है। पक्षियों से उसे बहुत प्यार है। एक गिलहरी कहीं चलती कार से न कुचल जाए इसके लिए खतरे से खेल जाती है। वो इतनी नाजुक है कि टेटनस की सुई लगवाने से भी डरती है। पर हालात बदलते हैं और उसकी कायापलट हो जाता है। वो भारत की जासूस बनके पाकिस्तान पहुंच जाती है। एक पाकिस्तानी सेना अधिकारी के बेटे से उसका निकाह होता हैभारत- पाकिस्तान युद्ध के पहले दोनों देशों के बीच तनाव बढ रहा है और सहमत खतरों से जूझते हुए भी अपना काम करती रहती है। वो खुफिया जानकारियां भेजती रहती है। भारत के लिए उसके मन में इतना प्यार है कि ये भी नहीं सोचती कि वो जो कर रही है उसका अंजाम क्या होगा? कर रही है उसका अंजाम क्या होगा? आखिर वो पाकिस्तान में है। पति और देश में वो देश को चुनती है। पाकिस्तान में वो दो लोगों की हत्या भी करती है, वरना उसका राज खुल जाता। उसका पति भी भारत की खुफिया एजेंसी की उस कार्रवाई में मारा जाता है जो उसके यानी सहमत को पाकिस्तान से निकालने के लिए की गई थी। ... अपना काम करने के बाद सहमत विधवा होकर अपने देश भारत लौट जाती है।

मेघना गुलजार की नई फिल्म 'राजी' का लब्बोलुवाब यही है। आलिया भट्ट ने इसमें सहमत नाम की उस लड़की का किरदार निभाया है। वैसे तो ये जासूसी कहानी है पर फिल्मों में दिखाई जानीवाली जासूसी कहानियों से काफी अलग। सहमत कोई जेम्स बांड मार्का जासूस नहीं है।

फिल्म में सस्पेंस तो भरपर है लेकिन वैसे एक्शन इसमें नहीं हैं जो. ज्यादातर थ्रिलर फिल्मों में दिखते हैं। एक घरेलू सामान्य औरत घर के सदस्यों के लिए पराठे बनाते हुए और टोस्ट सेंकते हुए किस तरह जाससी करती है और इसी का किस्सा है ये फिल्म। आलिया भट्ट ने जिस किरदार को निभाया है उसके अपने डर और संकोच हैं। सहमत कभी भी पकड़ी जा सकती है। आखिर जिस घर में वो खुफियागिरी कर रही है वो पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल का घर है। उसका राज कभी भी फाश हो सकता है। राज अब खुला तब खुला वाली हालत कई बार पैदा होती है। आलिया ने ऐसी परिस्थिति में फंसी सहमत के मानसिक तनाव के हर क्षण को जिस तरह सामने लाया है वो उनको एक बेहतरीन अभिनेत्री की कतार में खड़ा कर देता है। इसमें संदेह नहीं कि ये अब तक का आलिया भट्ट का सबसे अच्छा काम है। परी फिल्म आलिया या उनके चरित्र पर केंद्रित है। सहमत के पति इकबाल की भमिका में विकी कौशल का काम भी अच्छा है। आलिया भट्ट की असली मां सोनी राजदान इसमें सहमत की मां बनी हैं।

आलिया भट्ट की शानदार भूमिका के अलावा फिल्म तीन और बातों के लिए उल्लेखनीय हएक तो भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों पर आधारित होने के बावजूद किसी तरह के अंधराष्ट्रवाद को नहीं दिखाती। ये राष्ट्रवाद नहीं बल्कि देशभक्ति को दिखानेवाली फिल्म है। दूसरे, ये बड़े ही ताकतवर तरीके से दिखाता है कि मुस्लिम भी, खासकर कश्मीरी मुस्लिम भी, सहज रूप से देशभक्त हो सकते हैं और भारत के लिए अपनी जान की बाजी लगा सकते हैं। सहमत के पिता भी भारत । के लिए पाकिस्तान में जासूसी करते हैं निभाया ये भी फिल्म में दिखाया गया है। जयदीप अहलावत ने जिस भारतीय खुफिया अधिकारी की भूमिका निभाई है वो भी मुस्लिम है। तीसरे ये फिल्म युद्ध की व्ययंता और अमानवीयता को सामने लाती है। जंग में मरनवाले ज्यादातर निरीह और निर्दोष होते हैं। ये अक्सर भुला दिया जाता है। फिल्म इसकी याद दिलाती है। 

 'राजी' हरिंदर सिक्का के उपन्यास 'कॉलिंग सहमत' पर आधारित है। सिक्का भारतीय नौसेना के अधिकारी रहे हैं और कारगिल युद्ध के समय रिटायर्ड सेना के अधिकारी के रूप में हालात का जायजा लेने उस इलाके में गए थे। वहीं उन्होंने एक ऐसी लड़की की जानकारी मिली जो भारत के लिए पाकिस्तान में जासूसी करने गई थी। सहमत उसका वास्तविक नाम नहीं था। लड़की, जो अब इस दुनिया में नहीं है, भारत आने के बाद लंबे समय तक जीवित रही और उसका बेटा भी भारतीय सेना में या! वो खुद गुमनाम-सी रही और भारत पाकिस्तान युद्ध के इतिहास में उसका नाम दर्ज नहीं है। इसीलिए ये फिल्म उन अनाम लोगों की याद में भी है जो भारत-पाक युद्ध के समय मोर्चे पर नहीं थे पर देश के लिए अपने को या तो कुर्बान कर रहे थे या कुर्बान होने को तैयार थे। युद्ध में सिर्फ सैनिक नहीं लड़ता, सिर्फ वही नहीं मरता और लोग भी तड़ते हैं और मरते हैं।

- मेघना गुलजार की इस फिल्म को देखने के बाद 2017 में संकल्प रेड्डी के निर्देशन में आई फिल्म 'द गाजी अटैक की याद आती है। उसमें ये दिखाया गया या कि 1971 भारत-पाक युद्ध के समय पाकिस्तान ने भारतीय युद्धपोत 'आईएनएस विक्रांत' को ध्वस्त करने के लिए गुप्त तरीके से अपने युद्धपोत 'पीएनएस गाजी' को भेजा था। 'राजी' में ये जिक्र आता है, कि सहमत ने ये खुफिया जानकारी मंत्री थी कि पाकिस्तान नौसेना के माध्यम से कोई भारत के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। इस तरह का संदेश उस लड़की ने भारतीय खुफिया एजेंसी को भेजा था जिसका हरिंदर सिक्का की किताब में उल्लेख है। वक्त आ गया है कि सहमत के असली नाम को सामने लाया जाए। हरिंदर सिक्का ने अपने एक साक्षात्कार में कहा है कि 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान के फौजी शासक और तत्कालीन राष्ट्रपति के यहां यही कश्मीरी लड़की बच्चों को पढ़ाती थी और भारत के लिए खुफियागिरी करती थी।

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