Thursday, 30 January 2020 17:25

प्रत्यक्ष कर प्रणाली को और सरल बनाया जाए | Featured

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आम - बसट पेश होना है, लेकिन सरकार की दुश्वारियां हैं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं। आर्थिक मंदी और गिरती जीडीपी दर से सरकार जी जान पहले से ही हलकान कर रखी है। फिर अर्थव्यवस्था में जारी नरमी के कारण चालू  वर्ष में कर से प्राप्त राजस्व के भी लक्ष्य की तुलना में दो लाख करोड़ रुपये कम रह जाने की आशंका है। तमाम कोशिशों के बावजूद सरकार निराशा भरे माहौल को खुशगवार बनाने में नाकाम रही है। उच्च महंगाई दर से लेकर मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की सुस्ती ने उसकी फजीहत कर रखी है। जाहिर है कि उसकी कोशिश सकारात्मक और उम्मीदों से लबरेज बजट पेश करने की होगी। सवाल उठता है कि देश के मध्य आय वर्ग या नौकरीपेशा को इस बजट से क्या अपेक्षा करनी चाहिए?

            वेतन भोगियों और छोटे उद्यमियों का प्रतिनिधित्व करने वाला देश का यह मध्य आय वर्ग हमेशा की तरह मुंह बाये खड़ा है। साल दर साल और बजट दर बजट लाभ और राहत पाने की उम्मीदें उसके लब तक आते-आते छलक जाती हैं। सरकार टुकड़ों-टुकड़ों में यानी कभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए, कभी महिलाओं या अन्य वर्गों के लिए नाम मात्र की राहत पेश करती भी है, लेकिन पहले नोटबंदी और अब महंगाई से जूझ रहे इन वर्गों के लिए यह राहत जल्द ही काफूर हो जाती है।

            आम बजट 2020 में मध्य आय वर्ग के लिए सरकार का बड़ा कदम व्यक्तिगत आय कर की दरों में कटौती से संबंधित हो सकता है क्योंकि इसका सीधा वास्ता उपभोक्ता उपभोग में बढ़ोतरी से है। सितम्बर में काॅरपोरेट टैक्स रेट में कटौती होने से कंपनियों को काफी राहत मिली थी। बेशक, राजकोषीय बाध्यताओं की वजह से सरकार की अपनी सीमाएं हैं, लेकिन इस कदम से मांग बढ़ेगी जिसका लाभ पूरी अर्थव्यवस्था को प्राप्त होगा। वर्तमान में, 5 लाख रुपये से ऊपर की कर योग्य आय पर 20 प्रतिशत की दर से कर लिया जाता है, और 10 लाख रुपये से ऊपर की कर योग्य आय पर 30 प्रतिशत की दर से। जाहिर है कि 10 लाख रुपये तक की कमाई पर कर की दर खासी अधिक है। 10 लाख रुपये तक की आय के लिए कर की दर खासी अधिक है। 10 लाख रुपये की आये के लिए कर की दर में 10 प्रतिशत तक की कटौती या पांच से 15 लाख रुपये की सीमा में करदाताओं पर 15 प्रतिशत की विवेकसम्मत दर से कर लगाने पर करदाताओं के पास अधिक राशि आएगी जिसका उपयोग मांग बढ़ने के रूप में सामने आएगा या अगर पांच से 10 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर मौजूदा 20 फीसद की दर को घटाकर 10 फीसद तथा 10 से 20 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर मौजूदा 30 फीसद आय कर को घटाकर 20 फीसद कर दिया जाता है, तो भी इससे कम से कम फिलहाल वेतन भोगियों और मध्य वर्ग के लोगों को काफी राहत मिलेगी।  

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