स्वास्थ

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हमारे स्वयं के अंग या जैविक प्रणाली आम तौर पर बहुत अपने ही ढ़ंग से काम करते हैं। जैसे कि हमारा इम्यून सिस्टम जो अपने हिसाब से बनाता है और शरीर में काम करता है। हम सभी जानते हैं कि हमारा शरीर कई इंफेक्शन से खुद ही लड़ता है पर हम में किसी को नहीं पता कि वास्तव में ये होता कैसे है। कुल मिलाकर हमें यही समझना चाहिए कि शरीर के हर अंग की अपनी ही प्रणाली है। पर कभी कभार हमनें गड़बड़ी आ जाती है और ये बड़ी तेज गति से काम करने लगते हैं, जो आपके लिए पूरी तरह से नुकसानदेह हो सकता है। बच्चों में इम्यून सिस्टम का ज्यादा एक्टिवेट हो जाना उनके लिए जानलेवा हो सकता है। आइए आज हम समते हैं कि बच्चों में इम्यून सिस्टम के ओवरएक्टिव होने पर क्या होता है।

इम्यून सिस्टम अधिक एक्टिव कैसे हो जाता है?

इम्यून सिस्टम सेल्स टिश्यूज और अंगों का एक जटिल नेटवर्क है। कई बार हानिकारक माइक्रोब्स से लड़ने में ये एक्टिव हो जाते हैं, पर इसी समय ये माइक्रोब्स इन्हें नुकसान पहुंचा देते हैं और शरीर में वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण और फैल जाता है। ऐसे में जब शरीर की लड़ाकू कोशिकाएं सुपर सक्रिय हो जाती हैं तो अनियमित हो सकती हैं। एक अतिसक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर की हेल्दी सेल्स और टिशूज पर आक्रमण करती हैं, जिससे हम स्वप्रतिरक्षी विकारों को ट्रिगर करते हैं। हालांकि इसका कारण अभी तक खोजा नहीं जा सका है, लेकिन विशेषज्ञ इसे दोषपूर्ण आनुवांशिक बताते हैं। दुर्भाग्य से, ऑटोइम्यून विकार ज्यादातर अपरिवर्तित रहते हैं। यह मुख्य रूप से है क्योंकि क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी अभी भी हमारे देश में एक नवजात अवस्था में ही ऐसे जीन्स को ठीक नहीं कर पाती है। आइए अब जानते हैं कि ये बच्चों को बीमार कैसे कर सकती है |

ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण क्या हैं?

लक्षणों का एक भी सेट नहीं है जो ऑटोइम्यून बीमारी के स्पेक्ट्रम को कवर करता है। सबसे आम लक्षण निरर्थक होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक ऐसी स्थिति के कारण हो सकते हैं जिसका प्रतिरक्षा प्रणाली से कोई लेना-देना नहीं है। इससे डॉक्टरों को ऑटोइम्यून बीमारियों का निदान करना कठिन हो सकता है। नतीजतन, एक बच्चे को अपने लक्षणों के संभावित कारण को कम करने के लिए कई परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है।

देश का एक भी बच्‍चा और गर्भवती महिलाएं टीकाकरण अभियान से वंचित न रह जाएं, इसके लिए स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 2 दिसंबर से मिशन इंद्रधनुष आईएमआई 2.0 शुरू करने जा रहे है। इसके तहत गांव-गांव अभियान चलाकर बच्‍चों और महिलाओं का टीकाकरण किया जाएगा। 

भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने जानकारी देते हुए बताया कि, 2 तारीख से मिशन इन्द्रधनुष, आईएमआई 2.0 के लिए राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई है। उन्होंने राज्य के प्रमुख सचिवों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक और राज्यों के टीकाकरण अधिकारियों के साथ बातचीत की। आज आयोजित वीडियो कांफ्रेंस की समीक्षा के दौरान उत्तर प्रदेश, राजस्थान, असम, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री भी मौजूद थे।

डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने आईएमआई 2.0 के भाग के रूप में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के महत्व पर जोर दिया, और पूर्ण टीकाकरण कवरेज लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्राथमिकताओं से अवगत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, ग्राम स्वराज अभियान और विस्तारित ग्राम स्वराज अभियान में भी टीकाकरण को बल दिया गया है।

दरअसल, आईएमआई को 2017 में गुजरात के वडनगर से लॉन्च किया गया था। मंत्री ने कहा, आईएमआई 2.0 का लक्ष्य 27 राज्यों में 272 जिलों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज के लक्ष्यों को प्राप्त करना है और उत्तर प्रदेश और बिहार में 652 ब्लॉकों में ब्लॉक स्तर पर लागू किया जाएगा। डॉ हर्षवर्धन ने कहा, उद्देश्य 90 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज लक्ष्य को प्राप्त करना है। उन्होंने कहा, गहन मिशन इंद्रधनुश 2.0 के शुभारंभ के साथ, भारत में 2030 तक पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मौतों में और कमी लाने और सतत विकास लक्ष्य प्राप्त करने का अवसर है।