कानपुर। कर्मवीर पं. सुंदरलाल की जयंती और श्री गणेश शंकर विद्यार्थी जी की 135वीं जयंती के अवसर पर महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित स्मृति समारोह में कला और साहित्य की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य युवाओं में कला, साहित्य और सांस्कृतिक रुझान को बढ़ावा देना था। प्रतियोगिताओं में शामिल विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए समारोह को यादगार बना दिया।
कर्मवीर सुंदरलाल चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान साक्षी यादव ने प्राप्त किया। उनकी चित्रकला में रंगों की सही तकनीक और विषय की स्पष्टता ने निर्णायकों को प्रभावित किया। द्वितीय स्थान राखी गुप्ता और तृतीय स्थान अनन्या पटेल के नाम रहा। प्रत्येक प्रतिभागी ने अपने चित्रों में नवाचार और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया, जिससे समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया। इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को कला की बारीकियों और अभिव्यक्ति की क्षमता को समझने का अवसर दिया।

इसी तरह, कर्मवीर सुंदरलाल लेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान वाणी सिंह सैनी के नाम रहा। वाणी की रचनाओं में भावनाओं का सटीक चित्रण और भाषा की सरलता ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। द्वितीय स्थान सुभाष सिंह और तृतीय स्थान गौरी पांडेय को मिला। लेखन प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपने विचारों और भावनाओं को शब्दों के माध्यम से व्यक्त करने का मौका प्रदान किया। इसमें प्रतिभागियों की कल्पनाशक्ति, तर्कशीलता और साहित्यिक क्षमता देखने को मिली।
समारोह में अतिथि के रूप में लाहौर षड्यंत्र केस के महान क्रांतिवीर डॉ. गया प्रसाद के पुत्र क्रांति कटियार उपस्थित रहे। उन्होंने विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने युवाओं से कहा कि कला और साहित्य केवल प्रतियोगिता का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह हमारे समाज और संस्कृति की पहचान भी हैं। उनका यह संदेश विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।
स्मृति समारोह संयोजक प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि कला और साहित्य व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिताएं सिर्फ प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं बल्कि प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, उन्हें मंच प्रदान करने और रचनात्मक दृष्टि विकसित करने के लिए भी आयोजित की जाती हैं। इस अवसर पर पं दीन दयाल उपाध्याय विद्यालय की प्रधानाचार्य रेखा निगम ने विद्यार्थियों को लगातार पढ़ाई और कला में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों का रुझान कला, संस्कृति और साहित्य की ओर बढ़ाती हैं।
प्रतियोगिता समन्वयक मनमोहन श्रीवास्तव ने बताया कि समारोह का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने हुनर को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करना और उनकी मेहनत व प्रतिभा को सम्मानित करना था। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं अपने कौशल का प्रदर्शन कर सकें।
इस प्रकार, कर्मवीर सुंदरलाल स्मृति समारोह में आयोजित प्रतियोगिताओं ने प्रतिभागियों को न केवल अपनी कला और लेखन क्षमता दिखाने का मौका दिया, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक और साहित्यिक दृष्टि से भी समृद्ध किया। समारोह में पं रतन कुमार शुक्ला, सोनिया भल्ला, राघव मिश्रा, रितेन्द्र आदि मौजूद रहे|




