Monday, May 20, 2024

स्कूल ‘वेलनेस’ टीम बनाएं, आत्महत्या के जोखिम वाले छात्रों की पहचान करें : शिक्षा मंत्रालय

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों को आत्महत्या जैसा कदम उठाने से रोकने के लिए स्कूलों को जारी अपने मसौदा दिशा-निर्देशों में कहा है कि इसके लिए ‘वेलनेस’ (आरोग्य) टीम गठित करने के साथ ही आत्महत्या के जोखिम संबंधी संकेत प्रदर्शित करने वाले छात्रों की पहचान की जानी चाहिए और उनका समर्थन किया जाना चाहिए।

दिशानिर्देशों को विकसित करने के पीछे का विचार है कि ‘हर बच्चे का महत्व’ है। मसौदे में स्कूलों को संवेदनशीलता और समझ बढ़ाने तथा स्व-नुकसान के मामले में सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।

इसके अलावा, दिशानिर्देश स्कूलों, अभिभावकों और समुदाय के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने, आत्महत्या को रोकने और आत्मघाती व्यवहार से जुड़े कलंक को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में सामाजिक समर्थन को बढ़ावा देने पर भी जोर देते हैं।

मसौदे में सहपाठियों के साथ तुलना, विफलता को स्थायी मानने और अकादमिक प्रदर्शन को सफलता का एकमात्र मापदंड मानने सहित हानिकारक धारणाओं को त्यागने की भी सिफारिश की गई है। इसके अलावा खाली कमरों में ताला लगाने, अंधेरे गलियारों को रोशन करने और बगीचों तथा अत्यधिक घास वृद्धि वाले क्षेत्रों की सफाई करने की भी सिफारिश की गई है।

‘उम्मीद’ (समझें, प्रेरित करें, प्रबंधित करें, सहानुभूति रखें, सशक्त बनाएं, विकसित करें) दिशानिर्देशों का मसौदा ऐसे समय आया है, जब कोचिंग का केंद्र माने जाने वाले कोटा में इस साल इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई छात्रों ने आत्महत्या की है।

मसौदा दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि प्रधानाचार्य के नेतृत्व में ‘स्कूल वेलनेस टीम’ (एसडब्ल्यूटी) का गठन किया जा सकता है, जहां एसडब्ल्यूटी का प्रत्येक सदस्य संकट की स्थितियों से निपटने में निपुण हो। निर्देशों में कहा गया है कि जब चेतावनी संकेत प्रदर्शित करने वाले छात्र की पहचान किसी हितधारक द्वारा की जाए, तो उन्हें इसकी जानकारी एसडब्ल्यूटी को देनी चाहिए, जो तत्काल कार्रवाई करेगी।

दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘एसडब्ल्यूटी मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता पैदा करने और आत्महत्या की रोकथाम की दिशा में निर्देशित स्कूल गतिविधियों के कार्यान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हालांकि, अकेले एसडब्ल्यूटी आत्महत्या की रोकथाम के लिए स्कूल के प्रयासों में पर्याप्त नहीं होगी और इसके लिए सभी हितधारकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।’’

‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी

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