Sunday, July 14, 2024

आज है महान क्रांतिकारी पं किशोरी लाल का निर्वाण दिवस

लेखक – क्रांति कुमार कटियार

11 जुलाई शहीद-ए-आजम भगतसिंह के साथी क्रांतिकारी पंडित किशोरीलाल रतन का निर्वाण दिवस है, पर दुखद अब कहीं भी उनकी याद करने वाला कोई नहीं , पंडित किशोरीलाल का जन्म 06 जून 1909 में पंजाब के होशियारपुर जिले के धर्मपुर गाँव में हुआ था| उनके पिता रघुवीर दत्त शास्त्री अध्यापक थे और भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह के पगड़ी सम्हाल जट्टा आन्दोलन में सक्रिय रह चुके थे , वहीँ बड़े भाई आर्य समाज के प्रचारक थे जो अनेकानेक क्रांतिकारियों से परिचित थे और जिनके कारण ही किशोरीलाल भगत सिंह और कई क्रांतिकारियों के संपर्क में आये |

डी.ए.वी. कालेज लाहौर में पढ़ते समय किशोरीलाल भारत नौजवान सभा के संपर्क में आये और इसी ने उनके क्रांति के रास्ते पर चलने की आधारशिला रखी| हंसमुख स्वभाव के किशोरीलाल क्रांतिकारियों की बम फैक्ट्री में समर्पित भाव से काम करते थे और यहीं से बम बनाने के आरोप में देश के सुप्रसिद्ध लाहौर षड्यंत्र केस में अंग्रेजों द्वारा 15 अप्रैल 1929 को गिरफ्तार किये गए| उनकी कम आयु को देखते हुए उन्हें फांसी के स्थान पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.( इसी केस में सरदार भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गई थी)

देश की विभिन्न प्रांतो की जेलों मे रखते हुए उन्हें सेल्युलर जेल भेजने का निर्देश दिया गया| (( यहीं पर आपके साथी महावीर सिंह की भूख हड़ताल करते हुए मृत्यु हो गई थी )) । इस कारावास से उन्हें मुक्ति 17 वर्ष तक लगातार जेल में रहने के बाद 21 फरवरी 1946 में मिली| ( इसी दिन आपके आजीवन कारावास के साथी डॉ. गया प्रसाद कटियार, शिव वर्मा, जयदेव कपूर को भी 17 वर्षों बाद मिली)। आपने अपने लंबे जेल जीवन में कई लंबी- लंबी भूख हड़तालों में भी हिस्सा लिया |

आज़ादी के बाद उन्हें कांग्रेस में शामिल होने के कई निमंत्रण दिए गए पर उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल होकर देश सेवा करना उचित समझा| उन्होंने गोवा मुक्ति आन्दोलन में भी सक्रिय भूमिका अदा की और जमीनी स्तर पर लोगों की मदद के लिए कई प्रकल्प चलाए | वे जीवन के अंतिम समय तक मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता रहे। वे आजीवन अविवाहित रहे |

फगवाड़ा के निकट एक रोड एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल हो जाने का बाद उन्हें वहां के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ 11 दिन तक संघर्ष करने के बाद 11 जुलाई 1990 को उनकी मृत्यु हो गई.
उन्हें विनम्र एवं भावभीनी श्रद्धांजलि

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