Monday, March 30, 2026

प‌द्मश्री गिरिराज किशोर की पुस्तकों का लोकार्पण

29 मार्च 2026, रविवार को कानपुर की साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था अनुष्टुप द्वारा दोपहर 11:00 बजे प‌द्मश्री गिरिराज किशोर के पत्रों के संकलन की पुस्तक ‘कुछ अश्के जिगर’ का लोकार्पण गिरिराज किशोर के सूटर गंज स्थिति निवास पर किया गया। वरिष्ठ लेखक प्रियंवद द्वारा संकलित एवं संपादित तकरीबन 700 पन्नों का ये पत्रों पर आधारित ग्रंथ, गिरिराज किशोर की जिजीविषा व साहित्य सेवा का जीवंत प्रमाण है, जिसे संभावना प्रकाशन द्वारा छापा गया है। यह पुस्तक न सिर्फ तमाम साहित्यकारों के साथ गिरिराज किशोर के संबंधों की अंतर्कथा है, बल्कि उस दौर के साहित्यिक समाज और उसकी गतिविधियों का एक अहम दस्तावेज़ भी है। साहित्य के विद्यार्थियों के लिए यह किताब उस दौर के साहित्य और लेखकों को समझने का एक अहम टूल साबित हो सकती है।

साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित व प्रियंवद द्वारा संपादित गिरिराज किशोर रचना संचयन का लोकार्पण भी इसी कार्यक्रम में किया गया, इस पुस्तक में गिरिराज जी के विपुल लेखन भंडार में से कुछ महत्त्वपूर्ण कहानियों, लेखों, समीक्षाओं, संस्मरणों और एक नाटक (केवल मेरा नाम लो) व लगभग 75 पृष्ठ के उपन्यास ‘असलाह’ को शामिल किया गया है। यह उनके संपूर्ण लेखन की एक झाँकी है।

इस अवसर पर वरिष्ठ कथाकार और इन पुस्तकों के संपादक प्रियंवद ने कहा कि गिरिराज किशोर का लेखन गहन रचनात्मकता और सृजन के प्रति अकंपित आस्था का प्रतीक है। उनका पूरा लेखकीय जीवन सहजता, विनम्रता और कृतज्ञता की अनूठी मिसाल है। अपने समय और समाज से जुड़कर वह निस्पृह और समर्पित भाव से लेखन में सक्रिय रहे। उनके जीवन में साहित्य के अलावा कछ नहीं था। वह इसी को ओढ़ते-बिछाते थे। साहित्यिकारों के बीच उनका मन रमता था। अपने समकालीनों में अज्ञेय, नरेश मेहता, शैलेश मटियानी, ज्ञानरंजन और राजेंद्र यादव से उनके आत्मीय संबंध रहे। इनके साथ हुए पत्राचार से कई दशकों की रचनाशीलता की पहचान और परख की जा सकती है।

गिरिराज किशोर की पत्नी श्रीमती मीरा किशोर ने प्रियंवद का धन्यवाद करते हुए कहा कि हजारों की संख्या में बेतरतीब पड़े पत्रों के जखीरे को एक खूबसूरत किताब की शक्ल देने का इतना बड़ा काम सिर्फ वे ही कर सकते थे। इस पूरी प्रक्रिया में तकरीबन 5-6 साल की मेहनत लगी है। मीरा किशोर ने बताया कि गिरिराज जी के अपने समय के तमाम साहित्यकारों से प्रगाढ़ संबंध थे और उस दौर में पत्र ही आपसी सुख-दुःख बाँटने का मुख्य माध्यम थे। इसलिए इन पत्रों में उल्लिखित कई घटनाओं की वे खुद साक्षी भी रही हैं। गिरिराज जी अपनी साहित्य साधना के साथ-साथ अपने समकालीनों के आड़े वक्त में उनके साथ खड़े मिलते थे और इस पुस्तक में संकलित कई पत्र इस बात की तस्दीक करते हैं।

‘कुछ अश्के जिगर’ और ‘गिरिराज किशोर रचना संचयन’ को क्रमशः स‌द्भावना प्रकाशन और साहित्य अकादमी से मँगवाया जा सकता है। ‘कुछ अश्के जिगर’ अमेज़न और फ्लिपकार्ट सरीखे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध है।गिरिराज किशोर की पुत्री शिवा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन भावना मिश्रा ने किया। इस कार्यक्रम में अन्नू किशोर, सईद नकवी, दीपक मालवीय, छोटे भाई नरोना, अनीता मिश्रा, आनंद शुक्ल, खान फारूक, आशीष त्रिपाठी, नौशाद आलम, सुरेश गुप्ता आदि मौजूद थे।

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