Friday, October 23, 2026

शहादत के 152 साल बाद भी याद किए गए क्रांतिवीर सआदत खान, रेसीडेंसी कोठी पर वंशजों ने दी श्रद्धांजलि

इंदौर, 1 अक्टूबर 2026। मालवा की धरती पर 1857 की क्रांति का बिगुल फूंकने वाले महान क्रांतिकारी शहीद सआदत खान का आज 152वाँ शहादत दिवस है। 1 अक्टूबर 1874 को अंग्रेजों ने उन्हें इंदौर की रेसीडेंसी कोठी परिसर में एक पेड़ पर फाँसी दी थी।

इस ऐतिहासिक अवसर पर शहीद सआदत खान की पांचवी और छठी पीढ़ी सुबह 11 बजे – रेसीडेंसी स्थित शहीद स्मारक पहुँचे जहाँ पर आज भी वो ऐतिहासिक तोप ‘फतेह-मनजूर’ रखी है, जिससे सआदत खान ने 1 जुलाई 1857 को ब्रिटिश रेसीडेंसी के मुख्य द्वार को उड़ा दिया था। इसी हमले में अफगान युद्ध के हीरो कहे जाने वाले ब्रिटिश रेजीडेंट कर्नल ड्यूरंड को बिना लड़े जान बचाकर भागना पड़ा था। वंशजों ने यहाँ माल्यार्पण कर फातिहा पढ़ी। दोपहर में पीएससी भवन के सामने स्थित शहीद सआदत खान की पवित्र मजार पर पहुँचकर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए

वंशजों की अपील – स्मारक उपेक्षित, जीर्णोद्धार हो
इस मौके पर प्रपोत्र रिजवान खान ने मीडिया से भावुक अपील करते हुए कहा की “हमारे बुजुर्ग शहीद सआदत खान, जो महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय की घुड़सवार सेना के एक अधिकारी थे, उन्होंने मालवा में 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया था। 17 साल तक अंग्रेजों ने उन पर 5000 रुपये का इनाम रखा, अंत में बांसवाड़ा के जंगलों से गिरफ्तार कर 1 अक्टूबर 1874 को फांसी दी।”

“दुख है कि जिस कोठी पर उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी का झंडा उतारकर होलकर राज्य का झंडा फहराया था, आज उसी शहीद की निशानियां उपेक्षित पड़ी हैं। रेसीडेंसी का स्मारक और मजार दोनों जर्जर हालत में हैं।” उन्होंने मांग की है कि दोनों स्थलों का वैज्ञानिक पद्धति से जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण और प्रकाश व्यवस्था की जाए, तथा वहाँ शहीद का सम्पूर्ण इतिहास हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में लगाया जाए ताकि युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सके।

इतिहासकारों के अनुसार ईस्ट इंडिया कंपनी ने रेसीडेंसी कोठी का निर्माण 1820 में कराया था, जहाँ से पूरे मध्य भारत के रियासतों पर शासन चलता था। इसी कोठी पर सआदत खान के हमले को इंदौर के इतिहास की सबसे बड़ी क्रांतिकारी घटना माना जाता है। कार्यक्रम में वंशज परिवार से रियाज खान, ताहिर खान खिलजी, खालिद खान खिलजी, आजम खान खिलजी के अलावा समाजसेवी शाकिर मसूदी, शाहनवाज खान सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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