भारत के प्रमुख औद्योगिक नगरों में शुमार कानपुर को प्रायः उसके उद्योग, व्यापार और शैक्षिक संस्थानों के लिए जाना जाता है, किंतु उसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत कहीं अधिक व्यापक और समृद्ध है। इसी बहुआयामी स्वरूप को समेटने का सराहनीय प्रयास करती है “Kanpur – The City Through the Ages” कॉफी टेबल बुक, जिसकी परिकल्पना श्री नीरज श्रीवास्तव की थी। यह पुस्तक केवल चित्रों और तथ्यों का संग्रह नहीं, बल्कि कानपुर की आत्मा को समझने का एक गंभीर और आकर्षक प्रयास है।
पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कानपुर को केवल उसके अतीत के संदर्भ में नहीं देखती बल्कि उसके वर्तमान और संभावित भविष्य को भी समान महत्व देती है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में कानपुर की भूमिका से लेकर औद्योगिक क्रांति, शैक्षणिक विकास, सांस्कृतिक गतिविधियों और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक की यात्रा को पुस्तक ने क्रमबद्ध और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। ये कॉफी टेबल बुक केवल घटनाओं के विवरण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे यह भी दिखाते हैं कि किस प्रकार कानपुर ने समय के साथ स्वयं को बदलते भारत के अनुरूप ढाला है।
पुस्तक की शक्ति दृश्यात्मक प्रस्तुति
एक कॉफी टेबल बुक का मूल्यांकन उसके दृश्यात्मक प्रभाव के बिना अधूरा है। इस दृष्टि से यह पुस्तक अत्यंत सफल कही जा सकती है। दुर्लभ ऐतिहासिक चित्र, पुराने दस्तावेज़, स्थापत्य धरोहरों के छायाचित्र तथा आधुनिक कानपुर की झलकियाँ पाठक को एक दृश्य यात्रा पर ले जाती हैं। पुस्तक के प्रत्येक पृष्ठ पर चित्र और पाठ के बीच संतुलन दिखाई देता है। यह संतुलन पाठक को केवल जानकारी नहीं देता, बल्कि उसे शहर के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ता भी है।
पुस्तक में प्रस्तुत सामग्री यह संकेत देती है कि इसके निर्माण में व्यापक शोध और स्रोतों का अध्ययन किया गया है। ऐतिहासिक तथ्यों, सांस्कृतिक संदर्भों और संस्थागत उपलब्धियों को विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत किया गया है। विशेष रूप से कानपुर के औद्योगिक इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका का विवरण शोधपरक दृष्टिकोण का परिचायक है।
यह पुस्तक केवल उद्योगों के शहर की कहानी नहीं कहती, बल्कि साहित्य, शिक्षा, संस्कृति, खेल, सामाजिक आंदोलनों और नागरिक जीवन के अनेक पहलुओं को भी सामने लाती है। इससे पाठक को यह समझने में सहायता मिलती है कि कानपुर की पहचान केवल कारखानों और मिलों तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक जीवंत सांस्कृतिक और बौद्धिक केंद्र भी रहा है। आज के समय में जब स्थानीय इतिहास के प्रति युवाओं की रुचि अपेक्षाकृत कम होती जा रही है, यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में सामने आती है। विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, शोधार्थियों, इतिहासकारों और नगर अध्ययन में रुचि रखने वालों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
पंकज श्रीवास्तव की शोध सामग्री व संपादक महेन्द्र बहादुर सिंह की संपादकीय दृष्टि इस पुस्तक की आत्मा है। उन्होंने विभिन्न विषयों और कालखंडों को एक सूत्र में पिरोकर यह सिद्ध किया है|
इस कॉफ़ी टेबल बुक को अपनी योजना और संकल्पना से मूर्त रूप देने वाले नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि किसी शहर का इतिहास केवल घटनाओं का क्रम नहीं होता, बल्कि वह उसकी सामूहिक स्मृति, संघर्षों, उपलब्धियों और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होता है, उन्होंने जनमानस न्यूज़ के साथ विशेष साक्षात्कार में अपनी बात रखी
प्रश्न 1.) कानपुर पर कॉफी टेबल बुक तैयार करने का विचार सबसे पहले आपके मन में कैसे आया ? क्या कोई विशेष घटना या अनुभव इसकी प्रेरणा थी ?
उत्तर 1.) मैं पिछले 16 वर्षों से कानपुर के इंफ्रास्ट्रचर के लिए काम कर रहा हूँ, जिसके चलते वर्ष 2010 में तत्कालीन कानपुर कमिश्नर श्री अमित घोष की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय संयुक्त विकास समिति में मुझे समन्वयक नियुक्त किया गया था| मेरे पूर्व अनुभव के आधार पर मैं यह महसूस करता हूँ कि विभागीय स्तर पर होने वाले कार्यों का प्राथमिकता पर ना हो पाने के पीछे अहम कारण होता है कि बाहर से आए अधिकारी क्षेत्रीय समस्याओं को समझने में समय लगाते हैं और जब तक वे किसी योजना को मुकाम पर पहुँचाते हैं तब तक उनके जाने का वक़्त आ जाता है| वर्तमान कानपुर में रिंग रोड , बैराज एरिया , दादा नगर पुल , गोविंद नगर पुल , सिग्नेचर सिटी आदि कई डेवलेपमेंट के कार्य हो रहे थे अत: लगा कि इस विकासशील वर्तमान को कॉफी टेबल बुक के रूप में दर्ज करना चाहिए|
प्रश्न 2.) इस पुस्तक में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास तक की यात्रा दिखाई गई है, इतने व्यापक विषयों को एक ही पुस्तक में समेटने की सबसे बड़ी चुनौती क्या रही ?
उत्तर 2.) यदि काम करने की इच्छा हो तो आधी चुनौती वहीं खत्म हो जाती है , अहम चुनौती यहाँ के नागरिक कानपुर को किस रूप में देखना चाहते हैं यह समझना और सरकार की क्या मंशा है ये समझना रही , कोशिश ये थी की सरकार और उद्यमी के बीच यदि सीधा संवाद बन जाए| मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी जी ने ये पुस्तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को भी दिखाई है, जिसका सकारात्मक प्रभाव हम सब पर है|
प्रश्न 3.) कानपुर को अक्सर ‘मैनचेस्टर ऑफ द ईस्ट’ कहा जाता है। पुस्तक तैयार करते समय आपको कानपुर के औद्योगिक इतिहास का कौन-सा पहलू सबसे अधिक प्रभावित कर गया ?
उत्तर 3.) मुझे प्रभावित करने वाला पहलू ये था की देखिए कानपुर की औद्योगिक पहचान यहाँ की टेक्सटाइल इंडस्ट्री से रही इसलिए ही कानपुर को यूरोप के इंग्लैंड में मौजूद टेक्सटाइल शहर ‘ मेंचेस्टर ’ से तुलना करते हुए ‘मैनचेस्टर ऑफ द ईस्ट’ कहा गया, ये बात बहुत कम लोग जानते हैं दूसरा अहम उद्देश्य ये रहा की कानपुर की जिन इंडस्ट्रीयों का योगदान प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था को दुरुस्त रखने में सबसे अधिक है उनके और सरकार के बीच में समन्वय संभव हो सके|
प्रश्न 4.) इस पुस्तक के लिए ऐतिहासिक चित्रों, दस्तावेजों और तथ्यों का संकलन कितने वक़्त में और कैसे किया गया ?
उत्तर 4.) इस कार्य हेतु हमारी 6 लोगों की टीम है जिसने पुराने लोगों से बात-चीत करी, पुराने स्रोत ढूँढे इसके अतिरिक्त कानपुर से जुड़ाव ढाई दशक से अधिक का है इसलिए ही कई चीजें पूर्व मालूमात का भी हिस्सा रहीं, हम लोगों को इस कॉफी टेबल बुक को तैयार करने में 6 माह लगे|
प्रश्न 5.) पुस्तक में विरासत (Heritage) और विकास (Development) दोनों को समान महत्व दिया गया है। आपके अनुसार कानपुर के भविष्य के लिए इन दोनों के बीच संतुलन कितना आवश्यक है ?
उत्तर 5.) जी बिलकुल,शहर की इंडस्ट्रीयल लेगेसी ही लगभग 175 साल की हो रही है इसलिए ये संतुलन तो बेहद ही आवश्यक है जो नए कानपुर की दिशा निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका तय करेगा|
प्रश्न 6.) आपके अनुसार आज की युवा पीढ़ी कानपुर के इतिहास और विरासत के बारे में कितना जानती है, और यह पुस्तक उस अंतर को किस प्रकार भर सकती है ?
उत्तर 6.) देखिए टूरिज़्म भी एक तरह का एंटरटेंटमेंट है युवा पीढ़ी को यदि इतिहास और विरासत से सीखे तो उसके लिए हमें चीजों को सुलभ और सहज रूप में पेश करना होगा| कानपुर में गंगा जी एक दैवीय उप्लब्धी है, इसलिए गंगा जी में धार्मिक कार्यकमों के अतिरिक्त बोट क्लब , एडवेंचर एक्टिविटीज़ आदि बढ़ाईं गई हैं| मैं खुद ही वॉटर स्पोर्ट्स हब का सचिव हूँ| तो कानपुर में चल रहे ऐसे अनेक कार्य युवाओं को जोड़ रहे हैं जिनका विश्लेषण इस पुस्तक में किया गया है|
प्रश्न 7.) कानपुर के भविष्य को लेकर आपका व्यक्तिगत सपना क्या है और आपको लगता है कि यह शहर आने वाले 25 वर्षों में किस रूप में दुनिया के सामने खड़ा होगा ?
उत्तर 7.) कानपुर में बहुत संभावनाएं हैं और यहाँ के लोगों में भी बहुत उत्साह है इस उत्साह को दिशा देने का काम यदि हम सब मिलकर कर सकें तो बेहतर होगा क्योंकि कानपुर का इतिहास ही इतना वृहद तो निश्चित तौर पर भविष्य भी उत्तम होगा|
“Kanpur – The City Through the Ages” एक ऐसी कॉफी टेबल बुक है जो अपने उद्देश्य में सफल दिखाई देती है। यह पुस्तक कानपुर के गौरवशाली अतीत, गतिशील वर्तमान और संभावनाओं से भरे भविष्य के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती है। सुंदर प्रस्तुति, समृद्ध चित्र सामग्री, शोधपरक लेखन और संतुलित संपादन इसे केवल एक संग्रहणीय प्रकाशन नहीं, बल्कि कानपुर की पहचान का प्रामाणिक दस्तावेज़ बनाते हैं। समग्र रूप से यह पुस्तक कानपुर को जानने, समझने और उससे जुड़ने का एक उत्कृष्ट माध्यम है तथा नगर की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक योगदान है।




