Sunday, July 19, 2026

बिना नैतिकता के विधि ज्ञान अधूरा है : न्यायमूर्ति अनिल वर्मा , V.S.S.D. Collage में हुआ व्याख्यान का आयोजन

विक्रमाजीत सिंह सनातन धर्म कॉलेज, कानपुर के विधि विभाग द्वारा “Professional Ethics for Law Students” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन महाविद्यालय के मूट कोर्ट हॉल में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री अनिल वर्मा रहे। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता श्री यतीन्द्र शुक्ल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय की प्रबंधन समिति की सचिव सी०ए० नीतू सिंह, प्राचार्या प्रो० (डॉ) नीरू टंडन तथा विधि विभागाध्यक्ष प्रो० (डॉ) आर०के० पाण्डेय ने पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंट कर किया। अपने प्रेरक उद्बोधन में माननीय न्यायमूर्ति अनिल वर्मा ने कहा कि कानून का ज्ञान तभी सार्थक है. जब उसके साथ सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का समावेश हो। विधि व्यवसाय केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व और न्याय की स्थापना का संकल्प है। उन्होंने विद्यार्थियों को संविधान के आदर्शों के प्रति निष्ठावान रहते हुए निष्पक्ष, कर्मठ और संवेदनशील विधि व्यवसायी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी के अधिवक्ताओं और न्यायविदों को तकनीकी दक्षता के साथ साथ उत्कृष्ट चरित्र का भी निर्माण करना होगा।न्याय व्यवस्था में जनविश्वास बनाए रखने के लिए व्यावसायिक नैतिकता सर्वोपरि है।

विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता श्री यतीन्द्र शुक्ल ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि सफलता का आधार केवल विधिक ज्ञान नहीं, बल्कि निरंतर अध्ययन, अनुशासन, तर्कशक्ति, प्रभावी अभिव्यक्ति और नैतिक आचरण है। उन्होंने विद्यार्थियों को न्याय के प्रति समर्पित एवं समाज के प्रति उत्तरदायी अधिवक्ता बनने की प्रेरणा दी।

महाविद्यालय प्रबंधन समिति की सचिव सी०ए० नीतू सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और व्यावसायिक आचरण का विकास भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों को जीवन और करियर दोनों में सही दिशा प्रदान करते हैं तथा उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

प्राचार्या प्रो० (डॉ) नीरू टंडन ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विधि का उद्देश्य केवल कानून की व्याख्या करना नहीं, बल्कि समाज में न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान के साथ नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं को भी समान महत्व दें तथा अपने आचरण से विधि व्यवसाय की गरिमा को और ऊँचा उठाएँ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता श्री यतीन्द्र शुक्ल ने की। संचालन जनसम्पर्क प्रकोष्ठ द्वारा किया गया तथा अंत में विधि विभागाध्यक्ष प्रो० आर०के० पाण्डेय ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, अधिवक्तागण तथा बड़ी संख्या में विधि के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

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