छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के शिक्षा विभाग के एक शोध में सामने आया है कि डिजिटल युग में भी विद्यार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जीवन-मूल्य मानवता है। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के शिक्षा-दर्शन पर आधारित शांतिनिकेतन के पाठा भवन में किए गए इस अध्ययन में मानवता के साथ आत्मविश्वास और स्वतंत्रता को विद्यार्थियों के प्रमुख जीवन-मूल्य के रूप में चिन्हित किया गया।
शोधकर्ता एवं शिक्षा विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विमल सिंह ने 50 विद्यार्थियों पर 18 जीवन-मूल्यों के आधार पर अध्ययन किया। शोध में यह भी पाया गया कि जिज्ञासा, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को और अधिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। अध्ययन के अनुसार तकनीक के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व का संतुलन ही बेहतर शिक्षा की पहचान है।
यह शोध Research Review International Journal of Multidisciplinary (RRIJM) के नवीन अंक में प्रकाशित हुआ है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप ऐसे शोध समग्र एवं मूल्य-आधारित शिक्षा को नई दिशा देंगे। वहीं डॉ. विमल सिंह ने कहा कि टैगोर का शिक्षा-दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि इसका उद्देश्य केवल सफल पेशेवर नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।




