छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग ने एक बार फिर शोध और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हांसिल की है। विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में किया गया एक महत्वपूर्ण शोध अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Socio-Economic Perspectives में प्रकाशित हुआ है। यह शोध नई शिक्षा नीति NEP 2020 को लेकर शिक्षकों की जागरूकता पर आधारित है और इसके निष्कर्ष भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक माने जा रहे हैं।यह शोध शिक्षा विभाग की शोधार्थी रचना यादव द्वारा किया गया। शोध निर्देशन डॉ. विमल सिंह ने किया।
आज पूरे देश में नई शिक्षा नीति को लेकर बड़े स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं। ऐसे समय में यह जानना आवश्यक था कि क्या शिक्षक वास्तव में इस नीति को समझ पा रहे हैं और उसे लागू करने के लिए तैयार हैं। इसी उद्देश्य से किए गए इस विस्तृत अध्ययन में 1741 प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों को शामिल किया गया, जिनमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के शिक्षक सम्मिलित थे। अध्ययन में महिला और पुरुष दोनों शिक्षकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई।
शोध के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। अध्ययन में पाया गया कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के शिक्षकों में नई शिक्षा नीति के प्रति लगभग समान और उच्च स्तर की जागरूकता मौजूद है। शोध में यह भी सामने आया कि महिला और पुरुष शिक्षकों के बीच भी NEP 2020 की समझ को लेकर कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया।
शोध के अनुसार DIKSHA पोर्टल, NIPUN Bharat अभियान, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम और डिजिटल माध्यमों ने नई शिक्षा नीति की जानकारी शिक्षकों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसका सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि पहले जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच जागरूकता का अंतर दिखाई देता था, वह अब काफी कम हो चुका है।
अध्ययन में यह भी बताया गया कि आज के शिक्षक केवल नीति के बारे में सुन ही नहीं रहे, बल्कि उसे समझकर भविष्य की शिक्षा व्यवस्था में लागू करने के लिए भी तैयार हैं। शोधकर्ताओं ने इसे भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार बताया है।
शोध में सुझाव दिया गया कि आने वाले समय में शिक्षकों के लिए और अधिक व्यवहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ ताकि नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को सीधे कक्षा शिक्षण से जोड़ा जा सके। साथ ही AI और डिजिटल तकनीकों के उपयोग को भी शिक्षक प्रशिक्षण से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध केवल एक अकादमिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारत का शिक्षक समाज नई शिक्षा नीति को स्वीकार करने और उसे सफल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर का यह प्रयास शिक्षा, शोध और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।




