कानपुर: हिन्दी पत्रकारिता दिवस के मौके पर जनवादी लेखक संघ (जलेस) द्वारा साप्ताहिक समाचार पत्र ‘द मॉरल’ के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार स्व. शिव शरण त्रिपाठी के निधन पर अशोक नगर स्थिति जलेस कार्यालय में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
सभा की अध्यक्षता जनवादी लेखक संघ की सचिव अनीता मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि स्व. शिव शरण त्रिपाठी निर्भीक, जनपक्षधर पत्रकारिता के पर्याय थे। उन्होंने हमेशा वंचितों, शोषितों और आम जनता की आवाज़ को प्रमुखता से उठाया।
लेखक प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि त्रिपाठी जी खबर नहीं, नज़रिया देते थे। सत्ता से सवाल पूछना और सड़क की आवाज़ को मंच देना ही उनके लिए पत्रकारिता का धर्म था। साथ ही सूचित किया कि पूर्व राज्यपाल रामनाईक ने जहाँ त्रिपाठी जी की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया तो वहीं त्रिपाठी जी की बेटियों ने उनका प्राण प्रिय अखबार निरंतर संचालित रखने का प्रण लिया है|
ईशान बाजपेई ने कहा शिव शरण जी का जाना हिंदी पत्रकारिता और प्रगतिशील लेखन के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने बाज़ारवादी पत्रकारिता के दौर में भी खुद को कभी समझौतावादी नहीं बनने दिया। उनका लेखन युवाओं को सामाजिक चेतना से जोड़ता था|
मौली सेठ ने कहा उनकी संपादकीय टिप्पणियाँ सामाजिक सरोकारों और नैतिक मूल्यों पर केंद्रित रहती थीं। तो वहीं राजेश अरोड़ा ने कहा कि स्व. त्रिपाठी के जनवादी मूल्यों और नैतिक पत्रकारिता की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए जलेस प्रतिबद्ध रहेगा। इस अवसर पर शहर के वरिष्ठ साहित्यकारों और पत्रकारों ने भाग लिया। सभा के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।कार्यक्रम में विशेष रूप से देव कबीर, खुशी गुप्ता, कुंवरजीत, ज्ञान बाजपेई आदि मौजूद रहे|




