Monday, June 8, 2026

महुआ डाबर महोत्सव का शुभारंभ, शौर्य और शहादत की विरासत को किया गया नमन

बस्ती : क्रांति की सरज़मीं महुआ डाबर में तीन दिवसीय ‘महुआ डाबर महोत्सव’ का शुभारंभ सोमवार को हुआ। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन प्रख्यात लेखक प्रणब मुखर्जी ने किया। महोत्सव का केंद्रीय विषय ‘शौर्य, शहादत और विरासत’ रखा गया है।

उद्घाटन सत्र में प्रणब मुखर्जी ने कहा, “10 जून 1857 को यहां के क्रांतिवीरों ने छह ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों को मार गिराया था। यह वीरतापूर्ण प्रतिरोध अंग्रेजी हुकूमत के लिए सीधी चुनौती बन गया। प्रतिशोध में अंग्रेजों ने लगभग पांच हजार की आबादी वाले पूरे महुआ डाबर गांव को ‘गैर-चिरागी’ घोषित कर दिया। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के इस समृद्ध केंद्र को जलाकर राख कर दिया गया। नागरिकों की नृशंस हत्या कर महुआ डाबर का नामोनिशान मिटाने का प्रयास किया गया।”

महुआ डाबर संग्रहालय के निदेशक एवं क्रांतिकारी वंशज डॉ. शाह आलम राना ने कहा, “यह खेद का विषय है कि आजाद भारत की सरकारें भी महुआ डाबर के इस नरसंहार पर लंबे समय तक खामोश रहीं। देश में एक ही स्थान पर सर्वाधिक नागरिकों का नरसंहार महुआ डाबर में हुआ, लेकिन इतिहास की पुस्तकों में इसे उचित स्थान नहीं मिल सका। ”महोत्सव में एक प्रस्ताव पारित कर मांग की गई कि ब्रिटिश सरकार 3 जुलाई 1857 के महुआ डाबर वीभत्स नरसंहार के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगे। वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटेन को अपने औपनिवेशिक अपराधों को स्वीकार करना चाहिए।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आजादी के दीवानों की मोहरें, जवाहरात, सोना-चांदी, हथियार, पांडुलिपियां और जमीनें अंग्रेजों ने जब्त कर ‘रॉयल ट्रेजरी’ में जमा कर दी थीं। भारत सरकार और संसद से मांग की गई कि 1857 में जब्त क्रांतिवीरों की संपत्तियों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए तथा उनकी वापसी की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।

डॉ. राना ने बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के तहत महुआ डाबर को ‘स्वतंत्रता संग्राम सर्किट’ में शामिल किया गया था। साथ ही महुआ डाबर के निकट दस एकड़ क्षेत्र में एक जीवंत, भव्य और गौरवशाली सरकारी स्मारक विकसित करने की घोषणा भी की गई थी, लेकिन अभी तक यह योजना धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने मांग की कि महुआ डाबर में ‘शहादत विरासत कॉरिडोर’ विकसित किया जाए, ताकि विश्व इस गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके।

उद्घाटन समारोह में संस्कृतिकर्मी एवं लोकगायक सुनील पंडित ने महुआ डाबर की शहादत पर आधारित अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। समारोह को फकीर मोहम्मद खान, विजय प्रकाश, नासिर खान, अंकित राव, मुमताज खान, जहांगीर खान सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। तेज धूप और भीषण गर्मी के बावजूद विरासत यात्रा (हेरिटेज वॉक) का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में युवा, शोधार्थी और स्थानीय नागरिक इसमें शामिल हुए तथा महुआ डाबर के बिखरे ऐतिहासिक तथ्यों और विरासत से रूबरू हुए।

महुआ डाबर महोत्सव समिति से जुड़े सेनानी वंशज आदिल खान एडवोकेट ने बताया कि 9 जून को विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला के बाद सायं 5 बजे मनोरमा नदी के पावन तट पर पूर्ण स्वतंत्रता का उद्घोष करने वाले क्रांतिवीरों को मशाल सलामी दी जाएगी। महोत्सव 10 जून तक चलेगा। 10 जून को ‘शौर्य दिवस’ के अवसर पर शहीदों को सशस्त्र पुलिस गारद द्वारा सलामी दी जाएगी तथा विरासत संरक्षण संकल्प सभा का भी आयोजन किया जाएगा।

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